यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, यह डॉ. मुस्तफा खत्ताब के "स्पष्ट कुरआन" पर आधारित है।

Surah 59 - الحَشْر

Al-Ḥashr (सूरह 59)

الحَشْر (The Banishment)

मदनी सूरहमदनी सूरह

परिचय

यह मदनी सूरह अपना नाम आयत 2 से लेती है, जो बनू अन-नदीर नामक यहूदी क़बीले के मदीना से निष्कासन का उल्लेख करती है। उन्होंने मक्का के मुशरिकों के साथ मिलकर मुसलमानों के साथ हुए शांति समझौतों का उल्लंघन करने की साज़िश रची थी। मुनाफ़िक़ों की बनू अन-नदीर के साथ उनके गुप्त गठबंधन के लिए निंदा की गई है। युद्ध के माल (ग़नीमत) के वितरण के संबंध में कुछ निर्देश दिए गए हैं। सूरह का समापन सर्वशक्तिमान अल्लाह के प्रति अटूट आज्ञाकारिता पर ज़ोर देते हुए होता है, जिस पर अगली सूरह के आरंभ में और अधिक बल दिया गया है। अल्लाह के नाम से जो अत्यंत कृपाशील, दयावान है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।

बनी नज़ीर का निर्वासन

1. जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है, अल्लाह की तस्बीह करता है। वही ज़बरदस्त, हिकमत वाला है। 2. वही है जिसने अहले-किताब के काफ़िरों को उनके घरों से पहले हश्र (देश-निकाले) के लिए निकाला। तुम्हें गुमान भी न था कि वे निकलेंगे। और उन्होंने समझा था कि उनके किले उन्हें अल्लाह से बचा लेंगे। लेकिन अल्लाह उन पर ऐसी जगह से आया जहाँ से उन्हें गुमान भी न था। और उसने उनके दिलों में दहशत डाल दी, तो उन्होंने अपने घरों को अपने हाथों और मोमिनों के हाथों से तबाह कर दिया। तो इबरत हासिल करो, ऐ आँखों वालो! 3. अगर अल्लाह ने उनके लिए देश-निकाला न लिखा होता, तो वह उन्हें दुनिया में ज़रूर अज़ाब देता। और आख़िरत में उनके लिए आग का अज़ाब है। 4. यह इसलिए है कि उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल की अवज्ञा की। और जो कोई अल्लाह की अवज्ञा करता है, तो निश्चय ही अल्लाह दंड देने में बहुत कठोर है।

سَبَّحَ لِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ۖ وَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ
١
هُوَ ٱلَّذِىٓ أَخْرَجَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا مِنْ أَهْلِ ٱلْكِتَـٰبِ مِن دِيَـٰرِهِمْ لِأَوَّلِ ٱلْحَشْرِ ۚ مَا ظَنَنتُمْ أَن يَخْرُجُوا ۖ وَظَنُّوٓا أَنَّهُم مَّانِعَتُهُمْ حُصُونُهُم مِّنَ ٱللَّهِ فَأَتَىٰهُمُ ٱللَّهُ مِنْ حَيْثُ لَمْ يَحْتَسِبُوا ۖ وَقَذَفَ فِى قُلُوبِهِمُ ٱلرُّعْبَ ۚ يُخْرِبُونَ بُيُوتَهُم بِأَيْدِيهِمْ وَأَيْدِى ٱلْمُؤْمِنِينَ فَٱعْتَبِرُوا يَـٰٓأُولِى ٱلْأَبْصَـٰرِ
٢
وَلَوْلَآ أَن كَتَبَ ٱللَّهُ عَلَيْهِمُ ٱلْجَلَآءَ لَعَذَّبَهُمْ فِى ٱلدُّنْيَا ۖ وَلَهُمْ فِى ٱلْـَٔاخِرَةِ عَذَابُ ٱلنَّارِ
٣
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ شَآقُّوا ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ ۖ وَمَن يُشَآقِّ ٱللَّهَ فَإِنَّ ٱللَّهَ شَدِيدُ ٱلْعِقَابِ
٤

सूरह 59 - الحَشْر (एकत्रीकरण) - आयतें 1-4


खजूर के पेड़ों और माल-ए-ग़नीमत पर हुक्म

5. खजूर के जो भी पेड़ तुमने (ऐ ईमानवालो) काटे या उन्हें अपनी जड़ों पर खड़ा रहने दिया, तो यह सब अल्लाह की अनुमति से था, ताकि वह अवज्ञाकारियों को अपमानित करे। 6. और जो माल अल्लाह ने उनसे अपने रसूल को लौटाया है, उसके लिए तुमने न कोई घोड़ा दौड़ाया और न कोई ऊँट। बल्कि अल्लाह अपने रसूलों को जिस पर चाहता है, उस पर अधिकार देता है। और अल्लाह हर चीज़ पर पूर्णतः सक्षम है।

مَا قَطَعْتُم مِّن لِّينَةٍ أَوْ تَرَكْتُمُوهَا قَآئِمَةً عَلَىٰٓ أُصُولِهَا فَبِإِذْنِ ٱللَّهِ وَلِيُخْزِىَ ٱلْفَـٰسِقِينَ
٥
وَمَآ أَفَآءَ ٱللَّهُ عَلَىٰ رَسُولِهِۦ مِنْهُمْ فَمَآ أَوْجَفْتُمْ عَلَيْهِ مِنْ خَيْلٍ وَلَا رِكَابٍ وَلَـٰكِنَّ ٱللَّهَ يُسَلِّطُ رُسُلَهُۥ عَلَىٰ مَن يَشَآءُ ۚ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ قَدِيرٌ
٦

सूरह 59 - الحَشْر (एकत्रीकरण) - आयतें 5-6


आगामी माल-ए-ग़नीमत का वितरण

7. जो कुछ अल्लाह ने अपने रसूल को बस्तियों वालों से दिलवाया है, वह अल्लाह और रसूल के लिए है, और उनके निकट संबंधियों, अनाथों, गरीबों और (जरूरतमंद) मुसाफिरों के लिए है, ताकि धन केवल तुम्हारे धनवानों के बीच ही न घूमता रहे। रसूल तुम्हें जो कुछ दें, उसे ले लो। और जिस चीज़ से वह तुम्हें रोकें, उससे रुक जाओ। और अल्लाह से डरो। निःसंदेह अल्लाह दंड देने में अत्यंत कठोर है। 8. (यह माल) उन गरीब मुहाजिरों के लिए भी है जिन्हें उनके घरों और धन-संपत्ति से बेदखल कर दिया गया था, जो अल्लाह की कृपा और उसकी प्रसन्नता की तलाश में थे, और अल्लाह और उसके रसूल की सहायता करते थे। यही लोग सच्चे ईमान वाले हैं।

مَّآ أَفَآءَ ٱللَّهُ عَلَىٰ رَسُولِهِۦ مِنْ أَهْلِ ٱلْقُرَىٰ فَلِلَّهِ وَلِلرَّسُولِ وَلِذِى ٱلْقُرْبَىٰ وَٱلْيَتَـٰمَىٰ وَٱلْمَسَـٰكِينِ وَٱبْنِ ٱلسَّبِيلِ كَىْ لَا يَكُونَ دُولَةًۢ بَيْنَ ٱلْأَغْنِيَآءِ مِنكُمْ ۚ وَمَآ ءَاتَىٰكُمُ ٱلرَّسُولُ فَخُذُوهُ وَمَا نَهَىٰكُمْ عَنْهُ فَٱنتَهُوا ۚ وَٱتَّقُوا ٱللَّهَ ۖ إِنَّ ٱللَّهَ شَدِيدُ ٱلْعِقَابِ
٧
لِلْفُقَرَآءِ ٱلْمُهَـٰجِرِينَ ٱلَّذِينَ أُخْرِجُوا مِن دِيَـٰرِهِمْ وَأَمْوَٰلِهِمْ يَبْتَغُونَ فَضْلًا مِّنَ ٱللَّهِ وَرِضْوَٰنًا وَيَنصُرُونَ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥٓ ۚ أُولَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلصَّـٰدِقُونَ
٨

सूरह 59 - الحَشْر (एकत्रीकरण) - आयतें 7-8


मदीना के लोगों की श्रेष्ठता

9. और उन लोगों के लिए (भी है) जिन्होंने उनसे पहले इस शहर (मदीना) में घर बना लिया था और ईमान ले आए थे। वे उन लोगों से प्रेम करते हैं जो उनकी ओर हिजरत करके आते हैं, और जो कुछ मुहाजिरों को दिया जाता है, उसके लिए उनके दिलों में कोई लालच नहीं होता। वे उन्हें अपने ऊपर प्राथमिकता देते हैं, भले ही वे स्वयं आवश्यकता में हों। और जो कोई अपने नफ़्स (आत्मा) के लालच से बचा लिया गया, तो वही लोग सफल हैं।

وَٱلَّذِينَ تَبَوَّءُو ٱلدَّارَ وَٱلْإِيمَـٰنَ مِن قَبْلِهِمْ يُحِبُّونَ مَنْ هَاجَرَ إِلَيْهِمْ وَلَا يَجِدُونَ فِى صُدُورِهِمْ حَاجَةً مِّمَّآ أُوتُوا وَيُؤْثِرُونَ عَلَىٰٓ أَنفُسِهِمْ وَلَوْ كَانَ بِهِمْ خَصَاصَةٌ ۚ وَمَن يُوقَ شُحَّ نَفْسِهِۦ فَأُولَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْمُفْلِحُونَ
٩

सूरह 59 - الحَشْر (एकत्रीकरण) - आयतें 9-9


Al-Ḥashr () - अध्याय 59 - स्पष्ट कुरान डॉ. मुस्तफा खत्ताब द्वारा