यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, यह डॉ. मुस्तफा खत्ताब के "स्पष्ट कुरआन" पर आधारित है।

Surah 8 - الأنْفَال

Al-Anfâl (सूरह 8)

الأنْفَال (Spoils of War)

मदनी सूरहमदनी सूरह

परिचय

यह सूरह मदीना में अवतरित हुई थी ताकि यह समझाया जा सके कि 2 हिजरी/624 ईस्वी में बद्र में मक्का के मूर्तिपूजकों पर ईमान वालों की विजय के बाद युद्ध की लूट को कैसे वितरित किया जाना चाहिए। यह सूरह ईमान वालों को अल्लाह और उसके रसूल के प्रति सच्चे रहने का आग्रह करती है, उन्हें याद दिलाते हुए कि कैसे वे संख्या में कम थे, लेकिन अल्लाह ने उनकी सहायता के लिए फ़रिश्ते भेजे। यह स्पष्ट किया गया है कि यद्यपि विजय केवल अल्लाह की ओर से आती है, फिर भी ईमान वालों को हमेशा अपनी रक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए और शांति के लिए तत्पर रहना चाहिए। मूर्तिपूजकों को चेतावनी दी गई है कि दूसरों को अल्लाह के मार्ग से रोकने और सत्य का विरोध करने की उनकी साज़िशें केवल विफलता में समाप्त होंगी—एक ऐसा विषय जिस पर पिछली और अगली दोनों सूरहों में बल दिया गया है। अल्लाह के नाम से जो अत्यंत कृपाशील, दयावान है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।

ग़नीमत का बँटवारा

1. वे आपसे गनीमत के बारे में पूछते हैं (ऐ पैगंबर)। कहो, "उनका बँटवारा अल्लाह और उसके रसूल का है।" तो अल्लाह से डरो, अपने आपसी संबंध सुधारो, और अल्लाह और उसके रसूल की इताअत करो यदि तुम (सच्चे) मोमिन हो।

يَسْـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلْأَنفَالِ ۖ قُلِ ٱلْأَنفَالُ لِلَّهِ وَٱلرَّسُولِ ۖ فَٱتَّقُوا ٱللَّهَ وَأَصْلِحُوا ذَاتَ بَيْنِكُمْ ۖ وَأَطِيعُوا ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥٓ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
١

सूरह 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - आयतें 1-1


सच्चे ईमान वालों के गुण

2. (सच्चे) मोमिन तो बस वही हैं जिनके दिल अल्लाह के ज़िक्र पर काँप उठते हैं, और जब उन पर उसकी आयतें पढ़ी जाती हैं तो उनका ईमान बढ़ जाता है, और जो अपने रब पर भरोसा रखते हैं। 3. (वे) वे हैं जो नमाज़ क़ायम करते हैं और जो कुछ हमने उन्हें रिज़्क़ दिया है उसमें से खर्च करते हैं। 4. यही हैं सच्चे मोमिन। उनके लिए उनके रब के पास ऊँचे दर्जे हैं, मग़फ़िरत है और इज़्ज़तदार रिज़्क़ है।

إِنَّمَا ٱلْمُؤْمِنُونَ ٱلَّذِينَ إِذَا ذُكِرَ ٱللَّهُ وَجِلَتْ قُلُوبُهُمْ وَإِذَا تُلِيَتْ عَلَيْهِمْ ءَايَـٰتُهُۥ زَادَتْهُمْ إِيمَـٰنًا وَعَلَىٰ رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ
٢
ٱلَّذِينَ يُقِيمُونَ ٱلصَّلَوٰةَ وَمِمَّا رَزَقْنَـٰهُمْ يُنفِقُونَ
٣
أُولَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْمُؤْمِنُونَ حَقًّا ۚ لَّهُمْ دَرَجَـٰتٌ عِندَ رَبِّهِمْ وَمَغْفِرَةٌ وَرِزْقٌ كَرِيمٌ
٤

सूरह 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - आयतें 2-4


लड़ाई का विरोध

5. इसी तरह, जब तुम्हारे रब ने तुम्हें (ऐ पैग़म्बर) तुम्हारे घर से हक़ के साथ निकाला, तो ईमान वालों का एक गिरोह इसे बिल्कुल नापसंद कर रहा था। 6. वे तुमसे हक़ के बारे में झगड़ रहे थे, जबकि वह वाज़ेह हो चुका था, मानो उन्हें मौत की तरफ़ धकेला जा रहा हो और वे आँखों से देख रहे हों।

كَمَآ أَخْرَجَكَ رَبُّكَ مِنۢ بَيْتِكَ بِٱلْحَقِّ وَإِنَّ فَرِيقًا مِّنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ لَكَـٰرِهُونَ
٥
يُجَـٰدِلُونَكَ فِى ٱلْحَقِّ بَعْدَ مَا تَبَيَّنَ كَأَنَّمَا يُسَاقُونَ إِلَى ٱلْمَوْتِ وَهُمْ يَنظُرُونَ
٦

सूरह 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - आयतें 5-6


सत्य की स्थापना

7. (याद करो, ऐ ईमानवालो,) जब अल्लाह ने तुमसे वादा किया कि तुम्हें दोनों में से किसी एक पर विजय दिलाएगा, तो तुम चाहते थे कि तुम्हें निहत्था दल मिल जाए। लेकिन अल्लाह का इरादा था कि वह अपने वचनों से सत्य को स्थापित करे और काफ़िरों को जड़ से उखाड़ दे; 8. ताकि सत्य को दृढ़ता से स्थापित करे और असत्य को मिटा दे—भले ही दुष्टों को यह नागवार गुज़रे।

وَإِذْ يَعِدُكُمُ ٱللَّهُ إِحْدَى ٱلطَّآئِفَتَيْنِ أَنَّهَا لَكُمْ وَتَوَدُّونَ أَنَّ غَيْرَ ذَاتِ ٱلشَّوْكَةِ تَكُونُ لَكُمْ وَيُرِيدُ ٱللَّهُ أَن يُحِقَّ ٱلْحَقَّ بِكَلِمَـٰتِهِۦ وَيَقْطَعَ دَابِرَ ٱلْكَـٰفِرِينَ
٧
لِيُحِقَّ ٱلْحَقَّ وَيُبْطِلَ ٱلْبَـٰطِلَ وَلَوْ كَرِهَ ٱلْمُجْرِمُونَ
٨

सूरह 8 - الأنْفَال (युद्ध का माल) - आयतें 7-8


Al-Anfâl () - अध्याय 8 - स्पष्ट कुरान डॉ. मुस्तफा खत्ताब द्वारा