यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, यह डॉ. मुस्तफा खत्ताब के "स्पष्ट कुरआन" पर आधारित है।

Surah 62 - الجُمُعَة

Al-Jumu’ah (सूरह 62)

الجُمُعَة (Friday Congregation)

मदनी सूरहमदनी सूरह

परिचय

इस सूरह और पिछली सूरह में बहुत कुछ समान है। दोनों अल्लाह की प्रशंसा से शुरू होती हैं। पिछली सूरह (61:5) के अनुसार, उन यहूदियों में से जिन्होंने मूसा (अलैहिस्सलाम) को कष्ट पहुँचाया था, यहाँ तौरात (पद 5) का पालन न करने के लिए उनकी आलोचना की गई है। चूँकि पिछली सूरह (61:14) में ईसा (अलैहिस्सलाम) के शिष्यों की प्रशंसा की गई है, इसलिए इस सूरह (पद 2-4) में मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के सहाबा को सम्मानित किया गया है। पिछली सूरह (61:6) में ईसा (अलैहिस्सलाम) द्वारा नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की भविष्यवाणी की गई है, और इस सूरह में उन्हें मोमिनों पर अल्लाह के एहसान के रूप में प्रस्तुत किया गया है। पिछली सूरह के समान, मोमिनों को कुछ निर्देश दिए गए हैं—इस बार, जुमा की नमाज़ (पद 9) के संबंध में, जिससे इस मदनी सूरह को इसका नाम मिलता है। अल्लाह के नाम से—जो अत्यंत दयालु, असीम कृपावान है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।

अल्लाह का मोमिनों पर अनुग्रह

1. जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ पृथ्वी में है, वह अल्लाह की तस्बीह करता है – बादशाह, अत्यंत पवित्र, प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी की। 2. वही है जिसने उम्मी लोगों के लिए उन्हीं में से एक रसूल भेजा, जो उन्हें उसकी आयतें सुनाता है, उन्हें पवित्र करता है और उन्हें किताब और हिकमत सिखाता है, जबकि वे इससे पहले खुली गुमराही में थे। 3. और उनके दूसरों के लिए भी जो अभी तक उनसे नहीं मिले हैं। निःसंदेह वह प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है। 4. यह अल्लाह का अनुग्रह है। वह इसे जिसे चाहता है, प्रदान करता है। और अल्लाह असीम अनुग्रह का स्वामी है।

يُسَبِّحُ لِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ٱلْمَلِكِ ٱلْقُدُّوسِ ٱلْعَزِيزِ ٱلْحَكِيمِ
١
هُوَ ٱلَّذِى بَعَثَ فِى ٱلْأُمِّيِّـۧنَ رَسُولًا مِّنْهُمْ يَتْلُوا عَلَيْهِمْ ءَايَـٰتِهِۦ وَيُزَكِّيهِمْ وَيُعَلِّمُهُمُ ٱلْكِتَـٰبَ وَٱلْحِكْمَةَ وَإِن كَانُوا مِن قَبْلُ لَفِى ضَلَـٰلٍ مُّبِينٍ
٢
وَءَاخَرِينَ مِنْهُمْ لَمَّا يَلْحَقُوا بِهِمْ ۚ وَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ
٣
ذَٰلِكَ فَضْلُ ٱللَّهِ يُؤْتِيهِ مَن يَشَآءُ ۚ وَٱللَّهُ ذُو ٱلْفَضْلِ ٱلْعَظِيمِ
٤

सूरह 62 - الجُمُعَة (जुमा) - आयतें 1-4


अप्रयुक्त ज्ञान

5. उन लोगों का उदाहरण जिन्हें तौरात का भार सौंपा गया था, किन्तु वे उसका पालन करने में विफल रहे, एक गधे जैसा है जो किताबें ढो रहा हो। उन लोगों का उदाहरण कितना बुरा है जो अल्लाह की आयतों को झुठलाते हैं! निःसंदेह अल्लाह ज़ालिम लोगों को मार्ग नहीं दिखाता।

مَثَلُ ٱلَّذِينَ حُمِّلُوا ٱلتَّوْرَىٰةَ ثُمَّ لَمْ يَحْمِلُوهَا كَمَثَلِ ٱلْحِمَارِ يَحْمِلُ أَسْفَارًۢا ۚ بِئْسَ مَثَلُ ٱلْقَوْمِ ٱلَّذِينَ كَذَّبُوا بِـَٔايَـٰتِ ٱللَّهِ ۚ وَٱللَّهُ لَا يَهْدِى ٱلْقَوْمَ ٱلظَّـٰلِمِينَ
٥

सूरह 62 - الجُمُعَة (जुमा) - आयतें 5-5


बनी इसराईल को चुनौती

6. कहो, (हे नबी,) “ऐ यहूदियो! यदि तुम दावा करते हो कि तुम समस्त मानवजाति में से अल्लाह के चुने हुए (लोग) हो, तो मृत्यु की कामना करो, यदि तुम सच्चे हो।” 7. लेकिन वे कभी उसकी कामना नहीं करेंगे, क्योंकि उनके हाथों ने जो आगे भेजा है। और अल्लाह ज़ालिमों को भली-भाँति जानता है। 8. कहो, “जिस मृत्यु से तुम भाग रहे हो, वह निश्चित रूप से तुमसे आ मिलेगी। फिर तुम्हें प्रकट और अप्रकट के जानने वाले की ओर लौटाया जाएगा, और वह तुम्हें सूचित करेगा जो तुम करते थे।”

قُلْ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ هَادُوٓا إِن زَعَمْتُمْ أَنَّكُمْ أَوْلِيَآءُ لِلَّهِ مِن دُونِ ٱلنَّاسِ فَتَمَنَّوُا ٱلْمَوْتَ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ
٦
وَلَا يَتَمَنَّوْنَهُۥٓ أَبَدًۢا بِمَا قَدَّمَتْ أَيْدِيهِمْ ۚ وَٱللَّهُ عَلِيمٌۢ بِٱلظَّـٰلِمِينَ
٧
قُلْ إِنَّ ٱلْمَوْتَ ٱلَّذِى تَفِرُّونَ مِنْهُ فَإِنَّهُۥ مُلَـٰقِيكُمْ ۖ ثُمَّ تُرَدُّونَ إِلَىٰ عَـٰلِمِ ٱلْغَيْبِ وَٱلشَّهَـٰدَةِ فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
٨

सूरह 62 - الجُمُعَة (जुमा) - आयतें 6-8


जुमा की नमाज़ में शामिल होना

9. ऐ ईमान वालो! जब जुमा के दिन नमाज़ के लिए अज़ान दी जाए, तो अल्लाह के ज़िक्र की ओर तेज़ी से बढ़ो और अपना कारोबार छोड़ दो। यह तुम्हारे लिए बेहतर है, यदि तुम जानते। 10. जब नमाज़ अदा हो जाए, तो ज़मीन में फैल जाओ और अल्लाह का फ़ज़्ल तलाश करो। और अल्लाह को कसरत से याद करो ताकि तुम कामयाब हो जाओ।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا إِذَا نُودِىَ لِلصَّلَوٰةِ مِن يَوْمِ ٱلْجُمُعَةِ فَٱسْعَوْا إِلَىٰ ذِكْرِ ٱللَّهِ وَذَرُوا ٱلْبَيْعَ ۚ ذَٰلِكُمْ خَيْرٌ لَّكُمْ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
٩
فَإِذَا قُضِيَتِ ٱلصَّلَوٰةُ فَٱنتَشِرُوا فِى ٱلْأَرْضِ وَٱبْتَغُوا مِن فَضْلِ ٱللَّهِ وَٱذْكُرُوا ٱللَّهَ كَثِيرًا لَّعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
١٠

सूरह 62 - الجُمُعَة (जुमा) - आयतें 9-10


Al-Jumu'ah () - अध्याय 62 - स्पष्ट कुरान डॉ. मुस्तफा खत्ताब द्वारा