यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, यह डॉ. मुस्तफा खत्ताब के "स्पष्ट कुरआन" पर आधारित है।

Surah 49 - الحُجُرَات

Al-Ḥujurât (सूरह 49)

الحُجُرَات (The Private Quarters)

मदनी सूरहमदनी सूरह

परिचय

यह मदनी सूरह, जिसका नाम आयत 4 में पैगंबर के निजी कक्षों (हुजरों) के संदर्भ से लिया गया है, ईमान वालों को पैगंबर के प्रति उचित आचरण (आयत 1-5), अन्य ईमान वालों के साथ व्यवहार के सामाजिक शिष्टाचार (आयत 6-12) और शेष मानवता (आयत 13) के बारे में निर्देश देती है। सूरह के अंत में, खानाबदोश अरबों को यह शिक्षा दी गई है कि सच्चा ईमान केवल बातों से नहीं बल्कि कर्मों से सिद्ध होता है। अल्लाह के नाम से जो परम कृपालु, अत्यंत दयावान है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।

पैगंबर के साथ शिष्टाचार 1) अधिकार का सम्मान करें

1. ऐ ईमान वालो! अल्लाह और उसके रसूल से आगे न बढ़ो। और अल्लाह से डरो। बेशक अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا لَا تُقَدِّمُوا بَيْنَ يَدَىِ ٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ ۖ وَٱتَّقُوا ٱللَّهَ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
١

सूरह 49 - الحُجُرَات (निजी कक्ष) - आयतें 1-1


पैगंबर के साथ शिष्टाचार 2) अपनी ज़बान पर नियंत्रण रखें

2. ऐ ईमान वालो! अपनी आवाज़ें नबी की आवाज़ से ऊँची न करो, और न उनसे ऊँची आवाज़ में बात करो जैसे तुम आपस में एक-दूसरे से करते हो, कहीं ऐसा न हो कि तुम्हारे आमाल बर्बाद हो जाएँ और तुम्हें खबर भी न हो। 3. बेशक, जो लोग अल्लाह के रसूल के सामने अपनी आवाज़ें नीची रखते हैं, वही लोग हैं जिनके दिलों को अल्लाह ने परहेज़गारी के लिए आज़मा लिया है। उनके लिए मग़फ़िरत और बहुत बड़ा अज्र है।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا لَا تَرْفَعُوٓا أَصْوَٰتَكُمْ فَوْقَ صَوْتِ ٱلنَّبِىِّ وَلَا تَجْهَرُوا لَهُۥ بِٱلْقَوْلِ كَجَهْرِ بَعْضِكُمْ لِبَعْضٍ أَن تَحْبَطَ أَعْمَـٰلُكُمْ وَأَنتُمْ لَا تَشْعُرُونَ
٢
إِنَّ ٱلَّذِينَ يَغُضُّونَ أَصْوَٰتَهُمْ عِندَ رَسُولِ ٱللَّهِ أُولَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ ٱمْتَحَنَ ٱللَّهُ قُلُوبَهُمْ لِلتَّقْوَىٰ ۚ لَهُم مَّغْفِرَةٌ وَأَجْرٌ عَظِيمٌ
٣

सूरह 49 - الحُجُرَات (निजी कक्ष) - आयतें 2-3


पैगंबर के साथ शिष्टाचार 3) निजता का सम्मान करें

4. बेशक, उनमें से अधिकतर जो आपको (हे नबी) आपके हुजरों के बाहर से पुकारते हैं, वे समझ नहीं रखते। 5. और यदि वे धैर्य रखते जब तक आप उनके पास बाहर आते, तो यह उनके लिए निश्चय ही बेहतर होता। और अल्लाह बड़ा बख्शने वाला, निहायत मेहरबान है।

إِنَّ ٱلَّذِينَ يُنَادُونَكَ مِن وَرَآءِ ٱلْحُجُرَٰتِ أَكْثَرُهُمْ لَا يَعْقِلُونَ
٤
وَلَوْ أَنَّهُمْ صَبَرُوا حَتَّىٰ تَخْرُجَ إِلَيْهِمْ لَكَانَ خَيْرًا لَّهُمْ ۚ وَٱللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
٥

सूरह 49 - الحُجُرَات (निजी कक्ष) - आयतें 4-5


सामाजिक शिष्टाचार 1) ख़बर की पुष्टि करना

6. ऐ ईमान वालो, यदि कोई फासिक (दुराचारी) तुम्हें कोई खबर लाए, तो उसकी अच्छी तरह जाँच-पड़ताल कर लो, ताकि तुम अनजाने में किसी कौम को नुकसान न पहुँचा दो, फिर अपने किए पर पछताओ। 7. और याद रखो कि अल्लाह का रसूल तुम्हारे बीच में है। यदि वह बहुत से मामलों में तुम्हारी बात मान लेता, तो तुम अवश्य कठिनाई में पड़ जाते। लेकिन अल्लाह ने तुम्हारे लिए ईमान को प्रिय बना दिया है और उसे तुम्हारे दिलों में सुशोभित कर दिया है। और उसने कुफ्र, अवज्ञा और नाफरमानी को तुम्हारे लिए घृणित बना दिया है। वही लोग सीधे मार्ग पर हैं। 8. यह अल्लाह की ओर से एक कृपा और एक वरदान है। और अल्लाह सर्वज्ञ, महाज्ञानी है।

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا إِن جَآءَكُمْ فَاسِقٌۢ بِنَبَإٍ فَتَبَيَّنُوٓا أَن تُصِيبُوا قَوْمًۢا بِجَهَـٰلَةٍ فَتُصْبِحُوا عَلَىٰ مَا فَعَلْتُمْ نَـٰدِمِينَ
٦
وَٱعْلَمُوٓا أَنَّ فِيكُمْ رَسُولَ ٱللَّهِ ۚ لَوْ يُطِيعُكُمْ فِى كَثِيرٍ مِّنَ ٱلْأَمْرِ لَعَنِتُّمْ وَلَـٰكِنَّ ٱللَّهَ حَبَّبَ إِلَيْكُمُ ٱلْإِيمَـٰنَ وَزَيَّنَهُۥ فِى قُلُوبِكُمْ وَكَرَّهَ إِلَيْكُمُ ٱلْكُفْرَ وَٱلْفُسُوقَ وَٱلْعِصْيَانَ ۚ أُولَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلرَّٰشِدُونَ
٧
فَضْلًا مِّنَ ٱللَّهِ وَنِعْمَةً ۚ وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
٨

सूरह 49 - الحُجُرَات (निजी कक्ष) - आयतें 6-8


Al-Ḥujurât () - अध्याय 49 - स्पष्ट कुरान डॉ. मुस्तफा खत्ताब द्वारा