यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, यह डॉ. मुस्तफा खत्ताब के "स्पष्ट कुरआन" पर आधारित है।

Surah 43 - الزُّخْرُف

Az-Zukhruf (सूरह 43)

الزُّخْرُف (Ornaments)

मक्की सूरहमक्की सूरह

परिचय

यह मक्की सूरह अपना नाम आयत 35 में वर्णित आभूषणों से लेती है। मुशरिकों को अपने पूर्वजों का अंधानुकरण करने, फ़रिश्तों को अल्लाह की बेटियाँ कहने, यह दावा करने कि मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) धनी न होने के कारण वह्य प्राप्त करने के योग्य नहीं हैं, और अल्लाह के साथ इबादत में मूर्तियों को शरीक करने के लिए धिक्कारा गया है, हालाँकि वे मानते हैं कि वही आकाशों और धरती का एकमात्र निर्माता है। अगली सूरह के समान, मुशरिकों को जहन्नम में एक भयानक अज़ाब की चेतावनी दी गई है और मोमिनों को जन्नत में एक महान प्रतिफल का वादा किया गया है। अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत कृपाशील, परम दयावान है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।

कुरान की श्रेष्ठता

1. हा-मीम। 2. वाज़ेह किताब की क़सम! 3. बेशक हमने इसे अरबी क़ुरआन बनाया है ताकि तुम समझो। 4. और निश्चय ही, यह हमारे पास मूल ग्रंथ में अत्यंत प्रतिष्ठित और हिकमत से भरपूर है।

حمٓ
١
وَٱلْكِتَـٰبِ ٱلْمُبِينِ
٢
إِنَّا جَعَلْنَـٰهُ قُرْءَٰنًا عَرَبِيًّا لَّعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ
٣
وَإِنَّهُۥ فِىٓ أُمِّ ٱلْكِتَـٰبِ لَدَيْنَا لَعَلِىٌّ حَكِيمٌ
٤

सूरह 43 - الزُّخْرُف (आभूषण) - आयतें 1-4


इनकार करने वालों को चेतावनी

5. तो क्या हम तुमसे इस (क़ुरआनी) नसीहत को फेर लें, केवल इसलिए कि तुम एक अतिचारी कौम रहे हो? 6. हमने कितने ही नबी उन (नष्ट किए गए) लोगों की ओर भेजे जो पहले थे! 7. लेकिन उनके पास कोई नबी ऐसा नहीं आया जिसका उपहास न किया गया हो। 8. तो हमने उन्हें नष्ट कर दिया जो इन (मक्कावासियों) से कहीं अधिक शक्तिशाली थे। पूर्ववर्तियों के उदाहरण (पहले ही) बयान किए जा चुके हैं।

أَفَنَضْرِبُ عَنكُمُ ٱلذِّكْرَ صَفْحًا أَن كُنتُمْ قَوْمًا مُّسْرِفِينَ
٥
وَكَمْ أَرْسَلْنَا مِن نَّبِىٍّ فِى ٱلْأَوَّلِينَ
٦
وَمَا يَأْتِيهِم مِّن نَّبِىٍّ إِلَّا كَانُوا بِهِۦ يَسْتَهْزِءُونَ
٧
فَأَهْلَكْنَآ أَشَدَّ مِنْهُم بَطْشًا وَمَضَىٰ مَثَلُ ٱلْأَوَّلِينَ
٨

सूरह 43 - الزُّخْرُف (आभूषण) - आयतें 5-8


अल्लाह ही सृष्टिकर्ता है

9. यदि आप उनसे पूछें (ऐ नबी) कि आसमानों और ज़मीन को किसने पैदा किया, तो वे निश्चित रूप से कहेंगे, "अत्यंत शक्तिशाली, सर्वज्ञ ने (ही किया)।" 10. वही है जिसने तुम्हारे लिए ज़मीन को बिछाया और उसमें तुम्हारे लिए रास्ते बनाए ताकि तुम राह पा सको। 11. और वही है जो आसमान से एक ख़ास अंदाज़े से पानी उतारता है, जिससे हम एक मुर्दा ज़मीन को ज़िंदा करते हैं। और इसी तरह तुम्हें भी (दोबारा) उठाया जाएगा। 12. और वही है जिसने तमाम चीज़ों को जोड़ों में पैदा किया, और तुम्हारे लिए कश्तियाँ और चौपाए बनाए जिन पर तुम सवारी करते हो। 13. ताकि तुम उनकी पीठ पर अच्छी तरह से बैठ सको, और जब तुम उन पर जम जाओ तो अपने रब की नेमतों को याद करो, यह कहते हुए कि, 'पवित्र है वह जिसने इन्हें हमारे लिए वश में किया, जबकि हम स्वयं ऐसा करने वाले नहीं थे।' 14. और निःसंदेह अपने रब की ओर ही हम (सब) लौटेंगे।"

وَلَئِن سَأَلْتَهُم مَّنْ خَلَقَ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ لَيَقُولُنَّ خَلَقَهُنَّ ٱلْعَزِيزُ ٱلْعَلِيمُ
٩
ٱلَّذِى جَعَلَ لَكُمُ ٱلْأَرْضَ مَهْدًا وَجَعَلَ لَكُمْ فِيهَا سُبُلًا لَّعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ
١٠
وَٱلَّذِى نَزَّلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءًۢ بِقَدَرٍ فَأَنشَرْنَا بِهِۦ بَلْدَةً مَّيْتًا ۚ كَذَٰلِكَ تُخْرَجُونَ
١١
وَٱلَّذِى خَلَقَ ٱلْأَزْوَٰجَ كُلَّهَا وَجَعَلَ لَكُم مِّنَ ٱلْفُلْكِ وَٱلْأَنْعَـٰمِ مَا تَرْكَبُونَ
١٢
لِتَسْتَوُۥا عَلَىٰ ظُهُورِهِۦ ثُمَّ تَذْكُرُوا نِعْمَةَ رَبِّكُمْ إِذَا ٱسْتَوَيْتُمْ عَلَيْهِ وَتَقُولُوا سُبْحَـٰنَ ٱلَّذِى سَخَّرَ لَنَا هَـٰذَا وَمَا كُنَّا لَهُۥ مُقْرِنِينَ
١٣
وَإِنَّآ إِلَىٰ رَبِّنَا لَمُنقَلِبُونَ
١٤

सूरह 43 - الزُّخْرُف (आभूषण) - आयतें 9-14


अल्लाह की बेटियाँ?

15. फिर भी, मुशरिकों ने उसकी कुछ रचनाओं को उसका अंश ठहराया है। निःसंदेह, मनुष्य स्पष्ट रूप से कृतघ्न है। 16. क्या उसने अपनी सृष्टि में से (देवदूतों को अपनी) बेटियाँ बना लिया है और तुम्हें (ऐ मुशरिको) बेटों से नवाज़ा है? 17. जब उनमें से किसी एक को उस चीज़ की खुशखबरी दी जाती है जिसे वे रहमान (अत्यंत दयालु) की ओर मंसूब करते हैं, तो उसका चेहरा स्याह पड़ जाता है, और वह अपना गुस्सा पी जाता है। 18. क्या वे उसकी ओर उन लोगों को मंसूब करते हैं जो ज़ेवर-ज़ीनत में पाले जाते हैं और जो झगड़ों में स्पष्ट बात नहीं कर सकते? 19. फिर भी उन्होंने फ़रिश्तों को, जो रहमान के बंदे हैं, स्त्रियाँ ठहराया है। क्या वे उनकी रचना के गवाह थे? उनका कथन लिखा जाएगा और उनसे प्रश्न किए जाएँगे!

وَجَعَلُوا لَهُۥ مِنْ عِبَادِهِۦ جُزْءًا ۚ إِنَّ ٱلْإِنسَـٰنَ لَكَفُورٌ مُّبِينٌ
١٥
أَمِ ٱتَّخَذَ مِمَّا يَخْلُقُ بَنَاتٍ وَأَصْفَىٰكُم بِٱلْبَنِينَ
١٦
وَإِذَا بُشِّرَ أَحَدُهُم بِمَا ضَرَبَ لِلرَّحْمَـٰنِ مَثَلًا ظَلَّ وَجْهُهُۥ مُسْوَدًّا وَهُوَ كَظِيمٌ
١٧
أَوَمَن يُنَشَّؤُا فِى ٱلْحِلْيَةِ وَهُوَ فِى ٱلْخِصَامِ غَيْرُ مُبِينٍ
١٨
وَجَعَلُوا ٱلْمَلَـٰٓئِكَةَ ٱلَّذِينَ هُمْ عِبَـٰدُ ٱلرَّحْمَـٰنِ إِنَـٰثًا ۚ أَشَهِدُوا خَلْقَهُمْ ۚ سَتُكْتَبُ شَهَـٰدَتُهُمْ وَيُسْـَٔلُونَ
١٩

सूरह 43 - الزُّخْرُف (आभूषण) - आयतें 15-19


Az-Zukhruf () - अध्याय 43 - स्पष्ट कुरान डॉ. मुस्तफा खत्ताब द्वारा