यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, यह डॉ. मुस्तफा खत्ताब के "स्पष्ट कुरआन" पर आधारित है।

Âli-’Imran (सूरह 3)
آلِ عِمْرَان (The Family of 'Imran)
परिचय
इस मदनी सूरह का नाम आयत 33 में वर्णित आले-इमरान के नाम पर रखा गया है। पिछली सूरह
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।
ईश्वरीय ग्रंथ मार्गदर्शन के स्रोत के रूप में
1. अलिफ़-लाम-मीम 2. अल्लाह! उसके सिवा कोई माबूद नहीं, वह सदा जीवित, सब को संभालने वाला है। 3. उसने आप पर (ऐ पैगंबर!) सत्य के साथ किताब उतारी है, जो उससे पहले की किताबों की पुष्टि करती है, जैसे उसने तौरात और इंजील उतारी थी। 4. इससे पहले, लोगों के लिए मार्गदर्शन के तौर पर, और (भी) फ़ुरक़ान (सत्य और असत्य में भेद करने वाला) उतारा। निःसंदेह, जो लोग अल्लाह की आयतों को झुठलाते हैं, उनके लिए कठोर यातना है। क्योंकि अल्लाह सर्वशक्तिमान है, दंड देने में सक्षम है।
सूरह 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - आयतें 1-4
अल्लाह ता'आला
5. निःसंदेह, धरती में और न आकाशों में कोई भी चीज़ अल्लाह से छिपी हुई नहीं है। 6. वही है जो तुम्हें तुम्हारी माताओं के गर्भाशयों में जैसा वह चाहता है, आकार देता है। उसके सिवा कोई पूज्य नहीं, वह सर्वशक्तिमान, महाज्ञानी है।
सूरह 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - आयतें 5-6
स्पष्ट और गूढ़ आयतें
7. वही है जिसने तुम पर (ऐ पैगंबर) किताब नाज़िल की है। उसमें से कुछ आयतें मुहकम (स्पष्ट) हैं, वही किताब की असल बुनियाद हैं, और कुछ मुतशाबिह (अस्पष्ट) हैं। जिनके दिलों में टेढ़ है, वे फ़ित्ना पैदा करने और अपनी मनमानी व्याख्या करने के लिए मुतशाबिह आयतों के पीछे पड़ते हैं—जबकि उनका सही अर्थ अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता। और जो ज्ञान में गहरे हैं, वे कहते हैं, “हम इस पर ईमान लाए हैं, यह सब हमारे रब की ओर से है।” और नसीहत तो अक्ल वाले ही कबूल करते हैं। 8. (वे कहते हैं,) “हमारे रब! हमारे दिलों को टेढ़ा न कर, जब तू हमें हिदायत दे चुका है। हमें अपनी रहमत अता फरमा। बेशक तू ही बड़ा देने वाला है।” 9. हमारे रब! तू यकीनन तमाम इंसानों को उस (वादे के) दिन जमा करेगा—जिसमें कोई शक नहीं। बेशक अल्लाह अपना वादा नहीं तोड़ता।”
सूरह 3 - آلِ عِمْرَان (इमरान का परिवार) - आयतें 7-9
काफ़िरों का अज़ाब
10. बेशक, काफ़िरों का न तो माल और न ही उनकी औलाद अल्लाह के मुक़ाबले में उनके कुछ काम आएगी—और वे आग का ईंधन बनेंगे। 11. उनका हश्र फ़िरऔन के लोगों और उनसे पहले वालों जैसा ही होगा—उन सब ने हमारी निशानियों को झुठलाया, तो अल्लाह ने उनके गुनाहों के कारण उन्हें पकड़ लिया। और अल्लाह सज़ा देने में बहुत कठोर है। 12. (ऐ पैग़म्बर!) काफ़िरों से कह दो, “जल्द ही तुम पर ग़लबा पा लिया जाएगा और तुम्हें जहन्नम की ओर हाँका जाएगा—वह क्या ही बुरा ठिकाना है!”