यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, यह डॉ. मुस्तफा खत्ताब के "स्पष्ट कुरआन" पर आधारित है।

Al-’Ankabût (सूरह 29)
العَنْكَبُوت (The Spider)
परिचय
इस मक्की सूरह का नाम आयत 41 में मकड़ी के दृष्टांत से पड़ा है। सूरह का आरंभ आज़माइशों और मुसीबतों की भूमिका पर बल देता है, जो यह उजागर करती हैं कि वास्तव में कौन दृढ़ हैं और कौन नहीं। नूह, इब्राहीम, लूत और शुऐब अपनी दृढ़ता के लिए उल्लेखनीय हैं। विभिन्न कौमों और उनके विनाश के विभिन्न तरीकों का उल्लेख किया गया है, जो सत्य को झुठलाने के कारण हुआ (आयत 40)। पैगंबर और कुरान के विरुद्ध मुशरिकों के तर्कों का पूरी तरह से खंडन किया गया है। सूरह का समापन उन लोगों की प्रशंसा के साथ होता है जो अल्लाह पर भरोसा रखते हैं और उसके मार्ग में प्रयास करते हैं। यह समापन अगली सूरह के आरंभ के लिए मार्ग प्रशस्त करता है। अल्लाह के नाम से जो अत्यंत कृपालु, परम दयावान है।
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।
परीक्षा
1. अलिफ़-लाम-मीम। 2. क्या लोग यह सोचते हैं कि जब वे कहते हैं, "हम ईमान लाए," तो उन्हें आज़माया नहीं जाएगा? 3. हमने उनसे पहले वालों को अवश्य परखा। और (इस प्रकार) अल्लाह सच्चे और झूठे लोगों के बीच स्पष्ट रूप से अंतर करेगा। 4. क्या बुराई करने वाले यह समझते हैं कि वे हमसे बच निकलेंगे? उनका यह अनुमान कितना बुरा है!
सूरह 29 - العَنْكَبُوت (मकड़ी) - आयतें 1-4
सच्चे मोमिन
5. जो कोई अल्लाह से मुलाकात की उम्मीद रखता है, तो अल्लाह का मुकर्रर वक्त ज़रूर आएगा। और वह (अल्लाह) सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है। 6. और जो कोई (अल्लाह के मार्ग में) संघर्ष करता है, वह केवल अपने ही भले के लिए करता है। बेशक अल्लाह अपनी मखलूक में से किसी का भी मोहताज नहीं है। 7. जो लोग ईमान लाए और नेक अमल किए, हम उनसे उनके गुनाह ज़रूर दूर कर देंगे और उन्हें उनके बेहतरीन कामों के मुताबिक बदला देंगे। 8. हमने लोगों को अपने माता-पिता का सम्मान करने का आदेश दिया है। लेकिन अगर वे तुम्हें मेरे साथ ऐसी चीज़ों को शरीक करने पर मजबूर करें जिनका तुम्हें कोई इल्म नहीं है, तो उनकी बात मत मानना। मेरी ही तरफ तुम सब लौटोगे, और फिर मैं तुम्हें बताऊँगा कि तुम क्या करते थे। 9. जो लोग ईमान लाए और नेक अमल किए, उन्हें हम ज़रूर नेक लोगों में शामिल करेंगे।
सूरह 29 - العَنْكَبُوت (मकड़ी) - आयतें 5-9
मुनाफ़िक़
10. कुछ लोग ऐसे हैं जो कहते हैं, "हम अल्लाह पर ईमान लाए हैं," लेकिन जब उन्हें अल्लाह के मार्ग में कोई कष्ट पहुँचता है, तो वे लोगों के हाथों होने वाले इस उत्पीड़न को अल्लाह की सज़ा समझ लेते हैं। और जब तुम्हारे रब की ओर से विजय आती है, तो वे (ईमान वालों से) ज़रूर कहते हैं, "हम तो तुम्हारे साथ ही थे।" क्या अल्लाह उन सब के दिलों में जो कुछ है उसे भली-भाँति नहीं जानता? 11. अल्लाह ज़रूर ईमान वालों और मुनाफ़िक़ों के बीच अंतर करेगा।
सूरह 29 - العَنْكَبُوت (मकड़ी) - आयतें 10-11
झूठा वादा
12. काफ़िर ईमान वालों से कहते हैं, "बस हमारी राह पर चलो, और हम तुम्हारे गुनाहों का बोझ उठा लेंगे।" लेकिन वे ईमान वालों के किसी भी गुनाह का बोझ कभी नहीं उठाएंगे। वे सरासर झूठ बोल रहे हैं। 13. वे निश्चय ही अपने बोझ उठाएँगे, और अपने बोझों के साथ-साथ दूसरे बोझ भी। और क़यामत के दिन उनसे अवश्य पूछा जाएगा उस बात के विषय में जो वे गढ़ते थे।