यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से किया गया है। इसके अलावा, यह डॉ. मुस्तफा खत्ताब के "स्पष्ट कुरआन" पर आधारित है।

Surah 23 - المُؤْمِنُون

Al-Mu'minûn (सूरह 23)

المُؤْمِنُون (The Believers)

मक्की सूरहमक्की सूरह

परिचय

यह मक्की सूरह इस बात पर ज़ोर देती है कि ईमान वालों के लिए कामयाबी सुनिश्चित है (आयतः 1), जबकि इनकार करने वालों का नाकाम होना तय है (आयतः 117)। पिछली सूरह की तरह, यह अल्लाह की वहदानियत (एकेश्वरता) के साथ-साथ उसकी रचना करने और पुनर्जीवित करने की शक्ति का भी प्रमाण प्रस्तुत करती है। इसका अंतिम भाग ईमान वालों और इनकार करने वालों के न्याय को समर्पित है, जिसमें उन दुष्टों के अंजाम पर ध्यान केंद्रित किया गया है जो ईमान वालों को सताते हैं। यह विषय अगली सूरह तक फैला हुआ है। अल्लाह के नाम से जो परम कृपालु, अत्यंत दयावान है।

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।

सच्चे ईमानवाले

1. निश्चय ही सफल हुए ईमान वाले। 2. जो अपनी नमाज़ों में विनम्रता अपनाते हैं; 3. और जो व्यर्थ बातों से दूर रहते हैं; 4. जो ज़कात अदा करते हैं; 5. जो अपनी शर्मगाहों की हिफाज़त करते हैं 6. सिवाय अपनी पत्नियों के या उन (बाँदियों) के जो उनके कब्ज़े में हों, तो उन पर कोई मलामत नहीं, 7. लेकिन जो कोई उससे आगे की तलाश करता है, वही हद से गुज़रने वाले हैं। 8. जो अपनी अमानतों और अपने अहद (प्रतिज्ञाओं) के प्रति सच्चे हैं। 9. और जो अपनी नमाज़ों की पाबंदी करते हैं। 10. यही वे लोग हैं जिन्हें प्रदान किया जाएगा। 11. जन्नत उनकी अपनी होगी। वे उसमें सदा रहेंगे।

قَدْ أَفْلَحَ ٱلْمُؤْمِنُونَ
١
ٱلَّذِينَ هُمْ فِى صَلَاتِهِمْ خَـٰشِعُونَ
٢
وَٱلَّذِينَ هُمْ عَنِ ٱللَّغْوِ مُعْرِضُونَ
٣
وَٱلَّذِينَ هُمْ لِلزَّكَوٰةِ فَـٰعِلُونَ
٤
وَٱلَّذِينَ هُمْ لِفُرُوجِهِمْ حَـٰفِظُونَ
٥
إِلَّا عَلَىٰٓ أَزْوَٰجِهِمْ أَوْ مَا مَلَكَتْ أَيْمَـٰنُهُمْ فَإِنَّهُمْ غَيْرُ مَلُومِينَ
٦
فَمَنِ ٱبْتَغَىٰ وَرَآءَ ذَٰلِكَ فَأُولَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْعَادُونَ
٧
وَٱلَّذِينَ هُمْ لِأَمَـٰنَـٰتِهِمْ وَعَهْدِهِمْ رَٰعُونَ
٨
وَٱلَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَوَٰتِهِمْ يُحَافِظُونَ
٩
أُولَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْوَٰرِثُونَ
١٠
ٱلَّذِينَ يَرِثُونَ ٱلْفِرْدَوْسَ هُمْ فِيهَا خَـٰلِدُونَ
١١

सूरह 23 - المُؤْمِنُون (विश्वासी) - आयतें 1-11


इंसानों की रचना

12. और निःसंदेह, हमने इंसान को मिट्टी के सत्व से पैदा किया, 13. फिर हमने उसे एक सुरक्षित स्थान में वीर्य-बिंदु के रूप में रखा, 14. फिर हमने उस बूंद को जमे हुए रक्त के लोथड़े में विकसित किया, फिर उस लोथड़े को मांस के लोथड़े में, फिर उस मांस के लोथड़े को हड्डियों में, फिर हड्डियों को मांस से ढका, फिर हमने उसे एक नई सृष्टि के रूप में अस्तित्व में लाया। तो अल्लाह बड़ा ही बरकत वाला है, सबसे उत्तम सृष्टिकर्ता। 15. उसके बाद तुम अवश्य मरोगे, 16. फिर क़यामत के दिन तुम्हें उठाया जाएगा।

وَلَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ مِن سُلَـٰلَةٍ مِّن طِينٍ
١٢
ثُمَّ جَعَلْنَـٰهُ نُطْفَةً فِى قَرَارٍ مَّكِينٍ
١٣
ثُمَّ خَلَقْنَا ٱلنُّطْفَةَ عَلَقَةً فَخَلَقْنَا ٱلْعَلَقَةَ مُضْغَةً فَخَلَقْنَا ٱلْمُضْغَةَ عِظَـٰمًا فَكَسَوْنَا ٱلْعِظَـٰمَ لَحْمًا ثُمَّ أَنشَأْنَـٰهُ خَلْقًا ءَاخَرَ ۚ فَتَبَارَكَ ٱللَّهُ أَحْسَنُ ٱلْخَـٰلِقِينَ
١٤
ثُمَّ إِنَّكُم بَعْدَ ذَٰلِكَ لَمَيِّتُونَ
١٥
ثُمَّ إِنَّكُمْ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ تُبْعَثُونَ
١٦

सूरह 23 - المُؤْمِنُون (विश्वासी) - आयतें 12-16


अल्लाह की शक्ति

17. और निःसंदेह हमने तुम्हारे ऊपर सात आकाश बनाए। और हम अपनी सृष्टि से कभी गाफ़िल नहीं होते। 18. और हम आकाश से एक निश्चित मात्रा में पानी बरसाते हैं, फिर उसे ज़मीन में ठहरा देते हैं। और निश्चय ही हम उसे ले जाने पर भी क़ादिर हैं। 19. इससे हम तुम्हारे लिए खजूरों और अंगूरों के बाग पैदा करते हैं, जिनमें तुम्हारे लिए बहुत से फल हैं, और जिनसे तुम खाते हो। 20. और ज़ैतून के पेड़ भी जो तूर-ए-सीना पर उगते हैं, जो तेल देते हैं और खाने के लिए सालन भी। 21. और बेशक तुम्हारे लिए चौपायों में एक इबरत है, जिनके पेटों से हम तुम्हें पीने को (दूध) देते हैं, और उनमें तुम्हारे लिए बहुत से दूसरे फायदे भी हैं, और जिनसे तुम खाते हो। 22. और तुम उन पर और जहाज़ों पर ढोए जाते हो।

وَلَقَدْ خَلَقْنَا فَوْقَكُمْ سَبْعَ طَرَآئِقَ وَمَا كُنَّا عَنِ ٱلْخَلْقِ غَـٰفِلِينَ
١٧
وَأَنزَلْنَا مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءًۢ بِقَدَرٍ فَأَسْكَنَّـٰهُ فِى ٱلْأَرْضِ ۖ وَإِنَّا عَلَىٰ ذَهَابٍۭ بِهِۦ لَقَـٰدِرُونَ
١٨
فَأَنشَأْنَا لَكُم بِهِۦ جَنَّـٰتٍ مِّن نَّخِيلٍ وَأَعْنَـٰبٍ لَّكُمْ فِيهَا فَوَٰكِهُ كَثِيرَةٌ وَمِنْهَا تَأْكُلُونَ
١٩
وَشَجَرَةً تَخْرُجُ مِن طُورِ سَيْنَآءَ تَنۢبُتُ بِٱلدُّهْنِ وَصِبْغٍ لِّلْـَٔاكِلِينَ
٢٠
وَإِنَّ لَكُمْ فِى ٱلْأَنْعَـٰمِ لَعِبْرَةً ۖ نُّسْقِيكُم مِّمَّا فِى بُطُونِهَا وَلَكُمْ فِيهَا مَنَـٰفِعُ كَثِيرَةٌ وَمِنْهَا تَأْكُلُونَ
٢١
وَعَلَيْهَا وَعَلَى ٱلْفُلْكِ تُحْمَلُونَ
٢٢

सूरह 23 - المُؤْمِنُون (विश्वासी) - आयतें 17-22


पैगंबर नूह

23. निःसंदेह, हमने नूह को उसकी क़ौम की ओर भेजा। उसने कहा, "ऐ मेरी क़ौम! अल्लाह की इबादत करो। तुम्हारे लिए उसके सिवा कोई माबूद नहीं। तो क्या तुम डरते नहीं?" 24. लेकिन उसकी क़ौम के काफ़िर सरदारों ने कहा, "यह तो बस तुम्हारे जैसा एक इंसान है, जो तुम पर श्रेष्ठता प्राप्त करना चाहता है। अगर अल्लाह चाहता, तो वह फ़रिश्ते उतार देता। हमने अपने बाप-दादाओं में ऐसी बात कभी नहीं सुनी।" 25. वह तो बस पागल है, तो कुछ देर के लिए उसके साथ धैर्य रखो।

وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوْمِهِۦ فَقَالَ يَـٰقَوْمِ ٱعْبُدُوا ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَـٰهٍ غَيْرُهُۥٓ ۖ أَفَلَا تَتَّقُونَ
٢٣
فَقَالَ ٱلْمَلَؤُا ٱلَّذِينَ كَفَرُوا مِن قَوْمِهِۦ مَا هَـٰذَآ إِلَّا بَشَرٌ مِّثْلُكُمْ يُرِيدُ أَن يَتَفَضَّلَ عَلَيْكُمْ وَلَوْ شَآءَ ٱللَّهُ لَأَنزَلَ مَلَـٰٓئِكَةً مَّا سَمِعْنَا بِهَـٰذَا فِىٓ ءَابَآئِنَا ٱلْأَوَّلِينَ
٢٤
إِنْ هُوَ إِلَّا رَجُلٌۢ بِهِۦ جِنَّةٌ فَتَرَبَّصُوا بِهِۦ حَتَّىٰ حِينٍ
٢٥

सूरह 23 - المُؤْمِنُون (विश्वासी) - आयतें 23-25


Al-Mu'minûn () - अध्याय 23 - स्पष्ट कुरान डॉ. मुस्तफा खत्ताब द्वारा